Twilight

सपनों के सिरहाने पर रोज़ मिलते है,
बातें करते है, हसतें है और रोते है |
सुबह से शाम इस इंतज़ार में होती है,
कब दुनिया सो जाये और हम तुम्हारी आगोश में जागें |

वो सुबह सुबह नहीं जिसकी हवा में तुम्हारी खुशबू नहीं,
वो रात कभी आती नहीं जो तुम्हारे साथ बांटी न हो |

न कल कुछ था, न कल कुछ होगा |
बस आज है जो रोज़ खुद को दोहराता है |

कोई गिले-शिकवे नहीं हमें ज़िन्दगी से |
करें भी क्यूँ ?
जब दिन तुम्हारी याद में गुज़र जाता है |

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