Cost of Time

शिकवे, गिले, शिकायतें किस से करें ?
कल भी और आज भी,
तुम्हारे ही पास आते है अपना ग़म लेके |
जब तुमने ही ज़ख़्म दिए,
तो अब मरहम हम किस से लगवाये ?

मौसम कुछ ऐसा है,
की इसके मिज़ाज समझ नहीं आते |
तुम्हारे आने के इंतज़ार,
और तुम्हारे जाने के दर्द में,
अब इस ज़िन्दगी के मायने बयां होते है |

रुक जाये ये पल,
थम जाये ये लम्हें,
कैसे रोके तुम्हें ?
अब तुम ही बता दो |
कहो तो तुम्हारे वक़्त की कीमत हम अपनी साँसों में चुका दें |

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