Promises

कल साथ चलें थे तुम हमारे,
आज शायद किसी और के साथ हो |
वादे औरों की तरह तुमने भी हज़ार किये थे,
बस हम तुम पर यकीन कर बैठे |

तुम कहते हो की आज भी कुछ नहीं बदला,
तुम उतनी ही दुलारी आज भी हो,
कहो सच हम से,
यूँ नज़रें चुरा कर झूठ कब तक बोलोगे ?

अगर कागज़ के फूलों जैसे होता ये प्यार,
ख्याल रखते तो कुछ दूर तलक जाता |
तुमने तो काटों की बेड़ियाँ पैरों में डाल दी पायल बता कर |

तुम खुश हो हमें भुला कर,
हम बेवक़ूफ़,
आज भी करते है तुम्हारे लौटने के इंतज़ार |

जो गलती पहले की थी,
लो उसे फिर दोहराते है |
तुम्हारे झूठे वादों के यकीन,
चलो आज फिर कर लेते है |

Gist – like others you also made a thousand false promises, the only difference is that I choose to believe yours.

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s